सोमवार, 12 अप्रैल 2010

चंद लम्हे ..उस मुलाकत के ...!!!
कमलेश वर्मा

  • चंद लम्हों की मुलाकात बनी सबब जिन्दगी की ,
  • ता उम्र साथ मिलता तो क्या बात थी ।!

  • संवर जाती सूरत मेरे आने वाले कल की ,
  • हमेशा आफ़ताबे -नूर होता तो क्या बात थी ।!

  • यूँ छोडो भंवर में किश्ती मेरी जिन्दगी की ,
  • तुम किश्ती की पतवार बनती तो क्या बात थी ।!

  • गर डूबे जिन्दगी की मझधार में होगी रुसवाई ,
  • गर चलते साथ -साथ उस पार तो क्या बात थी ।!

  • ''कमलेश'' मुझ पर अहसान होगा इस जिन्दगी का ,
  • इक जिन्द -इक जान बन के जीते तो क्या बात थी ।!!

8 टिप्‍पणियां:

PRATUL ने कहा…

chitra itnaa sundar na daalen ki rachnaa par nazar hi na tike.
rachnaa — "Kyaa baatthii" kyaa baat hai.

संजय भास्कर ने कहा…

इक जिन्द -इक जान बन के जीते तो क्या बात थी ।

bahut khoob likha hai si ji

नरेश चन्द्र बोहरा ने कहा…

ता उम्र साथ मिलता तो क्या बात थी -- बहुत अच्छी रचना. प्यार मौहब्बत में उम्मीदें बहुत ज़रूरी है.

ओम पुरोहित'कागद' ने कहा…

bahut achhi rachna!
badhai ho!
ummed par to duniya kayam hai!
chhote se insani dill ki kya oukat?

अरुणेश मिश्र ने कहा…

रचना कारगर है ।

मुकेश कुमार तिवारी ने कहा…

कमलेश जी,

ता उम्र साथ मिलता तो क्या बात होती...

बहुत खूब बात कही है। यह बहुत ही बड़ा सच है कि अक्सर चंद लम्हों की मुलाकातें पूरी जिन्दगी याद रहती है, वहीं किसी के साथ पूरी जिन्दगी गुजार देने के बाद भी लगता है कि कहीं न कहीं कुछ कमी जरूर है।

सादर,


मुकेश कुमार तिवारी

कविता रावत ने कहा…

''कमलेश'' मुझ पर अहसान होगा इस जिन्दगी का ,
इक जिन्द -इक जान बन के जीते तो क्या बात थी ।!!
......बहुत खूब... यह उक्ति चरितार्थ होती है......
'प्रेम गली अति सांकरी जामे दो न समाये'

anu ने कहा…

bahut khub