शनिवार, 27 नवंबर 2010

श्रद्धांजलि .....डा . सुनील वर्मा दुवारा ....


तुमने पिता खोया है…

और तुमने पति…

मैंने खोया है क्या…

पता है तुम्हे…?

खोया है मैंने…

पिता भी…पति भी…

एक रक्षक…पथ प्रदर्शक…

एक दोस्त भी…मैंने खोया है…!

जानता हूँ मैं….कि…

विलाप तुमने किया था…

किन्तु हूक जो उठ रही है…

वो मेरे दिल की आवाज है…सुनो तुम…

तुम ही रोई थी…आंसू भी बहाए थे तुम्ही ने…

किन्तु जख्म मेरी आँखों के…

आज भी हरे हैं…!

आह भी नहीं भर सकता हूँ…

रो भी नहीं सकता…

हाँ पुत्र बन कभी…कि कभी पुत्री…

या कि बनकर जीवन संगिनी उसकी…

कभी शिष्य…

तो कभी दोस्त बनकर…

भावनाओं की श्रद्धांजलि जरुर दे सकता हूँ उसे…

यही मेरे प्यार के श्रद्धा सुमन हैं….http://shraddhanjali.in

3 टिप्‍पणियां:

mridula pradhan ने कहा…

ekdam bhwbhini....

राकेश कौशिक ने कहा…

"भावनाओं की श्रद्धांजलि"
आवश्यकता भी इसी की होनी चाहिए
मार्मिक -प्रशंसनीय प्रस्तुति

sumant ने कहा…

अत्यंत प्रभावी रचना