बुधवार, 3 मार्च 2010

घोर कलियुग ...???

क्या होगा भगवान , इन कलयुग के अवतारों का
फूटा भांडा इस ''इच्छाधारी ''के व्यभिचारों का ,

नतमस्तक होती जहाँ दुनिया ,तेरे चरणों में ,
'मुक्ति का द्वार है' वर्णित है चारों वर्णों में

हाय ,सबकी किस्मत फूटी ,जाएँ अब किस ओर ,
तेरे नाम की दुकान पर, बैठे दुष्कर्मी ,पापी चोर

बोलो कैसे ?सुधरेगा जीवों का कलुषित जीवन ,
बगुले रहेंगे हमको ठगते, इसी तरह आजीवन

देखो इस ढोंगी को कैसे संत कहाता था ,
प्रभु नाम की ओट में महापुरुष कहलाता था

खुली पोल दुनिया ने देखा ?कैसा आडम्बर ''
शैतान के चोले में छुपा बैठा था ''सौदागर '

दुष्ट अधर्मी ने धर्म का किया, गडबड झाला ,
फूलों की जगह अब पहनाओ, जूतों की माला

कुछ करो प्रभु इन दुष्टों के संहार की ,
कब तक भक्त करें प्रतीक्षा , अगले अवतार की ,

आओ प्रभु बचाओ' यश ' अपने देश महान का ,
''कमलेश ''देश का बच्चा -बच्चा भूखा है स्वाभिमान का

6 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

कमलेश ''देश का बच्चा -बच्चा भूखा है स्वाभिमान का ॥

lajwaab parastuti........

श्याम कोरी 'उदय' ने कहा…

हाय ,सबकी किस्मत फूटी ,जाएँ अब किस ओर ,
तेरे नाम की दुकान पर बैठे दुष्कर्मी ,पापी चोर ।
.......सुन्दर भाव !!!

Mithilesh dubey ने कहा…

कमलेश भईया आपने सारा कुछ अन्तिम पंक्तियों मे ही कह दिया , आपकी रचना दिल को छू गयी ।

संजय भास्कर ने कहा…

आपके लेखन ने इसे जानदार और शानदार बना दिया है....

JHAROKHA ने कहा…

sachchai ko bayan karati ek behatarin prastuti.
poonam

Asha ने कहा…

ऐसे आडम्बर से सचेत करती कविता |अच्छी लगी
आशा