चारो ओर यह आतंक का साया ,
यह कहाँ से आया है ॥?
जमीं पर ये खून के छींटे ,यत्र -तत्र छितराया ...
यह कहाँ से आया है ?
हक मांगने के तरीके ओर बहुत हैं ,
यह तरीका किसने सिखलाया .है ॥?
जैसे जीत कर आया है जंग ..
जब की इसने -उसने भाई का ही खून बहाया .है ..!!
मूल में कोई नहीं जाना चाहता है ..
इन दोनों को किसने बरगलाया है ॥?
समस्या खत्म तो क्या होगी ?
कौन जाने ,जब बन गया यही दोनों का सरमाया है ।
मरेंगे बेटे -बाप और पति किसीके ,
उठेगा जिनके सर उपर साया है ॥?
''कमलेश'' क्यों नही समझते दोनों तरफ ,
अब तक किस ने क्या पाया है ..!!?
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मंगलवार, 6 अप्रैल 2010
गुरुवार, 1 अप्रैल 2010
जिंदगी के झंझावातों से....!!?

जिंदगी के झंझावातों से निकल जाना चाहता हूँ.
शून्य की गोद मे बिल्कुल पिघल जाना चाहता हूँ..
कुच्छ भी नही है उस शून्य के उस पार, ...
कुच्छ भी नही है उस शून्य के उस पार, ...
लेकर अपने अस्तित्व को बिखर जाना चाहता हूँ,,
यह जिंदगी है घूमती उस शून्य की तरह ,
पता नही मैं किधर जाना चाहता हूँ,,
संवेदनाओं की धृोहर जो दी है आपने ,
उनको लेकर ना इधर ना उधर जाना चाहता हूँ!!
यह जिंदगी है घूमती उस शून्य की तरह ,
पता नही मैं किधर जाना चाहता हूँ,,
संवेदनाओं की धृोहर जो दी है आपने ,
उनको लेकर ना इधर ना उधर जाना चाहता हूँ!!
चित्र साभार ...राज भाटिया जी
बुधवार, 3 मार्च 2010
घोर कलियुग ...???
क्या होगा भगवान , इन कलयुग के अवतारों का
फूटा भांडा इस ''इच्छाधारी ''के व्यभिचारों का ,
नतमस्तक होती जहाँ दुनिया ,तेरे चरणों में ,
'मुक्ति का द्वार है' वर्णित है चारों वर्णों में ।
हाय ,सबकी किस्मत फूटी ,जाएँ अब किस ओर ,
तेरे नाम की दुकान पर, बैठे दुष्कर्मी ,पापी चोर ।
बोलो कैसे ?सुधरेगा जीवों का कलुषित जीवन ,
बगुले रहेंगे हमको ठगते, इसी तरह आजीवन ।
देखो इस ढोंगी को कैसे संत कहाता था ,
प्रभु नाम की ओट में महापुरुष कहलाता था ।
खुली पोल दुनिया ने देखा ?कैसा आडम्बर ''
शैतान के चोले में छुपा बैठा था ''सौदागर '
दुष्ट अधर्मी ने धर्म का किया, गडबड झाला ,
फूलों की जगह अब पहनाओ, जूतों की माला ।
कुछ करो प्रभु इन दुष्टों के संहार की ,
कब तक भक्त करें प्रतीक्षा , अगले अवतार की ,
आओ प्रभु बचाओ' यश ' अपने देश महान का ,
''कमलेश ''देश का बच्चा -बच्चा भूखा है स्वाभिमान का ॥
फूटा भांडा इस ''इच्छाधारी ''के व्यभिचारों का ,
नतमस्तक होती जहाँ दुनिया ,तेरे चरणों में ,
'मुक्ति का द्वार है' वर्णित है चारों वर्णों में ।
हाय ,सबकी किस्मत फूटी ,जाएँ अब किस ओर ,
तेरे नाम की दुकान पर, बैठे दुष्कर्मी ,पापी चोर ।
बोलो कैसे ?सुधरेगा जीवों का कलुषित जीवन ,
बगुले रहेंगे हमको ठगते, इसी तरह आजीवन ।
देखो इस ढोंगी को कैसे संत कहाता था ,
प्रभु नाम की ओट में महापुरुष कहलाता था ।
खुली पोल दुनिया ने देखा ?कैसा आडम्बर ''
शैतान के चोले में छुपा बैठा था ''सौदागर '
दुष्ट अधर्मी ने धर्म का किया, गडबड झाला ,
फूलों की जगह अब पहनाओ, जूतों की माला ।
कुछ करो प्रभु इन दुष्टों के संहार की ,
कब तक भक्त करें प्रतीक्षा , अगले अवतार की ,
आओ प्रभु बचाओ' यश ' अपने देश महान का ,
''कमलेश ''देश का बच्चा -बच्चा भूखा है स्वाभिमान का ॥
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