गुरुवार, 10 जून 2010

बात मेरी नही उनकी ,

बात मेरी नही उनकी ,
निकली थी फ़िज़ाओं मे..

उसको दिल मे ही रख ली,
क्यूँ
की ये उनकी
बात थी //

2 टिप्‍पणियां:

संजय भास्कर ने कहा…

सुन्दर अभिव्यक्ति...कम शब्दों में गहरी बात...हमेशा की तरह...

mridula pradhan ने कहा…

very good.